dev diwali 2021 || 2021 देव दिवाली कब है

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 2021 देव दिवाली कब है

अमावस्या के 15 दिन बाद मनाई जाती है देव दिवाली, जानिए धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त |

 

2021 देव दिवाली कब है
2021 देव दिवाली कब है


हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है लेकिन क्या आपको पता है दिवाली के पंद्रह दिन बाद देव दिवाली भी मनाई जाती है। इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दिवाली के रूप में मनाया जाता है। इस बार कार्तिक मास की पूर्णिमा 19 नवंबर को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवलोक से सभी देवता वाराणसी यानि महाकाल की नगरी काशी में पधारते हैं। इसलिए कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को काशी में बहुत साज-सज्जा की जाती है। तो चलिए जानते हैं देव दिवाली का महत्व शुभ मुहूर्त और कथा:-

 

देव दीवाली 2021 तिथि मुहूर्त 

 

देव दीवाली 2021
देव दीवाली 2021 तिथि मुहूर्त


पूर्णिमा तिथि 19 नवंबर 2021 की रात 12 बजकर 47 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो 30 नवंबर 2020 को रात 02 बजकर 59 मिनट को समाप्त होगी। देव दिवाली पर भी प्रदोष काल में पूजा की जाती है। इस बार देव दिवाली पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त  30 नवंबर को संध्या के समय 05.08 बजे से लेकर 07.47 बजे तक है।


जानते हैं देव दीवाली का धार्मिक महत्व

 

देव दीवाली 2021
देव दीवाली का धार्मिक महत्व


पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से सभी बहुत त्रस्त हो चुके थे। तब सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उस राक्षस का संहार कर दिया। जिससे सभी को उसके आतंक से मुक्ति मिल गई। जिस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था, वह कार्तिक पूर्णिमा का दिन था। तभी से भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी पड़ा। इससे सभी देवों को अत्यंत प्रसन्नता हुई। तब सभी देवतागण भगवान शिव के साथ काशी पहुंचे और दीप जलाकर खुशियां मनाई। कहते हैं कि तभी से ही काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती रही है। इस दिन  दीप दान का बहुत महत्व माना गया है। इसलिए इस दिन विशेष रूप से दीपदान किया जाता है। 

 

 कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

 
कार्तिक पूर्णिमा 2021
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली के साथ गुरु पर्व यानि गुरुनानक जयंती भी मनाई जाती है। इसलिए इस दिन का महत्व बहुत बढ़ जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार जाते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।  


देव दीवाली क्यों मनाई जाती है?


देव दीपावली वाराणसी में गंगा नदी के तट पर मनाई जाती है। यह दीवाली उत्सव के अंत के साथ-साथ तुलसी विवाह के अनुष्ठान का समापन करती है। देव दीपावली का धार्मिक महत्व इस विश्वास में निहित है कि इस दिन देवी और देवता गंगा नदी में पवित्र स्नान करने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। पवित्र नदी का पूरा घाट देवताओं और देवी गंगा नदी के सम्मान में लाखों छोटे मिट्टी के दीपक (दीया) से सुसज्जित किया जाता है। मिट्टी के दीपक जलाने की इस रस्म की शुरुआतवर्ष 1985 में पंचगंगा घाट पर की गई थी।

ऐसा माना जाता है कि इसी दिन, भगवान शिव त्रिपुरासुर नामक राक्षस पर विजयी हुए थे और इसलिए इस त्योहार को त्रिपुरा उत्सव के रूप में भी जाना जाता है। देव दीवाली पर आने वाले अन्य त्योहार गुरु नानक जयंती और जैन प्रकाश पर्व हैं।

धार्मिक महत्व के अलावा, यह दिन देशभक्ति के महत्व से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन, भारतीय बलों में सभी बहादुर सैनिक, जो भारत के लिए लड़ते हुए शहीद हो गये थे, उनको याद किया जाता है और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

वाराणसी में शहीदों को श्रद्धांजलि के रूप में पुष्पांजलि अर्पित की जाती है। यह आयोजन गंगा सेवा निधि द्वारा भव्य पैमाने पर आयोजित किया जाता है। देशभक्ति के गीत गाए जाते हैं और अंतिम तीन भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा समारोह को समाप्त किया जाता है।


देव दीवाली पर क्या करें?


इस त्योहार पर, भक्त पवित्र गंगा में स्नान करते हैं जिसे कार्तिक स्नान के रूप में जाना जाता है। इसके बाद दीप दान किया जाता है, अर्थात् देवी गंगा को श्रद्धा के प्रतीक के रूप में तेल के दीपक अर्पित किए जाते हैं। गंगा आरती इस धार्मिक त्योहार का एक प्रमुख आकर्षण है, जो 24 पुजारियों और 24 युवा लड़कियों द्वारा अत्यंत पवित्रता और भक्ति के साथ किया जाता है।

देव दीवाली दिनांक
देव दीवाली दिनांक


देव दीवाली कैसे मनाई जाती है?


बनारस या वाराणसी में देव दीपावली को बहुत ही धूमधाम और भव्यता के लिए जाना जाता है। इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए हजारों भक्त पवित्र शहर का भ्रमण करते हैं।

यह त्यौहार वाराणसी में और गुजरात के कुछ हिस्सों में बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लोग इस दिन अपने घरों को रंगोली और हर कोने में हल्के तेल के दीयों से सजाते हैं। कुछ घरों में भोग के वितरण के बाद अखंड रामायण का पाठ भी किया जाता है।

देव दीपावली महोत्सव की मुख्य परंपरा चंद्र दर्शन पर मनाई जाती है। गंगा नदी और देवी देवताओं के सम्मान में, गंगा नदी के सभी घाट यानी रवि घाट से लेकर राज घाट तक, को छोटे-छोटे दीयों (मिट्टी के दीयों) से सजाया जाता है।
देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भव्य जुलूस इस त्योहार का मुख्य आकर्षण है। पटाखों के साथ रात में आमसान को सुशोभित किया जाता है और लोग रात भर भक्ति नृत्य और संगीत का आनंद लेते हैं।

Dev Diwali in English

(Dev Diwali) is the famous festival celebrated in Varanasi and east UP. Celebrated due to the victory of Lord Shiva over demon Tripurasur.

देव दीपावली संबंधित अन्य नाम :- 

(देव दीपावली, त्रिपुरारी पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा)

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